uptet में रोज आ रहे उतार चढ़ाव को देखते हुए अब जिज्ञासाओं को धक्का लगने लगा है सो अस्थायी तौर पर मैंने ब्लॉग को अपडेट करने पर विराम लगा रखा है| परिस्थितियों के पुना सही होने पर इस कार्य को आगे बढाया जायेगा |
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Tuesday, February 14, 2012
Wednesday, January 18, 2012
मौअल्लिम को न लागू करें टीईटी---
जागरण संवाददाता, सम्भल : मौअल्लिम-ए -उर्दू वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश संरक्षक आफताब पठान ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी की सरकार ने मौअल्लिम उर्दू डिग्रीधारकों के साथ धोखा किया है। इसका परिणाम उसे विधान सभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
सोमवार को बेगम सराय में हुई बैठक में कहा गया कि जिस तरह केन्द्र ने मदरसों को शिक्षा अधिकार कानून के दायरे से बाहर कर दिया उसी तरह सूबे में 1997 तक के मौअल्लिम डिग्रीधारकों को टीईटी परीक्षा लागू न किया जाये।
इस मौके पर संगठन की भीमनगर इकाई का गठन किया गया। अब्दुल कादिर जीलानी जिलाध्यक्ष, इकबाल मौहम्मद वरिष्ठ उपाध्यक्ष, मौ. गुल एजाज उपाध्यक्ष, शफीकुर्रहमान बरकाती महामंत्री, मौ. हाजिक जिला मीडिया प्रभारीके अलावा शहरोज अख्तर, मौ. मुरसलीन, तसद्दुक अली और अजहर कादरी को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया।
यूपीटीईटी परीक्षा के 50 हजार अभ्यर्थियों की मार्कशीट पहुंची---
मेरठ। यूपी टीईटी-11 की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए 50 हजार से अधिक अभ्यर्थियों की मार्कशीट सोमवार को संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय को इलाहाबाद से प्राप्त को गयी है। जल्दी ही राजकीय इंटर कॉलेज से मार्कशीट का वितरण किया जाएगा।
... यूपीटीईटी परीक्षा वर्ष-11 गत 13 नवंबर को हुई थी जिसमें 99 हजार से अधिक अभ्यर्थी सम्मिलित हुए थे। माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद ने परीक्षा का परिणाम भी गत 25 नवम्बर को घोषित कर दिया था। लेकिन कुछ सवालों के उत्तर गलत होने के कारण संशोधन किये गये। संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में भी करीब साढ़े छह सौ अभ्यर्थियों ने परिणाम में संशोधन के लिए आवेदन किया था। इस कारण उनकी मार्कशीट अभी तक कार्यालय को नहीं भेजी गयी थीं। सोमवार को जेडी कार्यालय को परीक्षा में उत्तीर्ण हुए 50,650 अभ्यर्थियों की मार्कशीट प्राप्त हो गयी है। इनमें 26,390 प्राइमरी व 23260 उच्च प्राथमिक की हैं।
संयुक्त शिक्षा निदेशक मंजू सिंह का कहना है कि मंगलवार को राजकीय इंटर कालेज प्रधानाचार्य और अन्य अधिकारियों की विशेष बैठक लेंगी। इस बैठक में यह तय किया जाएगा कि मार्कशीट का वितरण किस तिथि से अब किया जाए। वहीं, कार्यालय सूत्रों का कहना है कि 20 या 21 जनवरी से मार्कशीट का वितरण हो सकता है। जिस पर विचार विमर्श किया जा रहा है।
टी.ई.टी. धांधली की लोकायुक्त से शिकायत--
इलाहाबाद। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में गड़बड़ियों का मामला लोकायुक्त तक पहुंच गया है। परिणाम में सात दफे संशोधन के बाद भी असंतुष्ट और निराश अभ्यर्थियों ने टीईटी संघर्ष मोर्चा बनाया है और इसी बैनर से लोकायुक्त से गंभीर शिकायतें की हैं। मोर्चा ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के चार अधिकारियों पर टीईटी में अच्छे अंक के लिए भारी वसूली का आरोप लगाया है और दावा किया है कि लोकायुक्त के मांगने पर कुछ सुबूत भी देंगे। मोर्चा के अभ्यर्थियों ने इस मामले में अधिकारियों, उनके खास बाबुओं और परिजनों के खातों तथा संपत्तियों की जांच की मांग उठाई है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि अगले दस दिन लोकायुक्त की तरफ से पहल का इंतजार करेंगे। जांच न होने पर दस अभ्यर्थियों का एक प्रतिनिधिमंडल कुछ सुबूतों के साथ उनसे मिलेगा। उसके बाद भी अधिकारियों के खिलाफ जांच न हुई तो अभ्यर्थी न्यायालय की शरण लेंगे। मोर्चा के सदस्यों का द...ावा है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों ने भारी रकम लेकर चुनिंदा अभ्यर्थियों के लिए बाहर से भरा ओएमआर जमा कराया। अभ्यर्थियों का कहना है कि पूरे मामले की ठीक से जांच हो तो पूरा परिणाम रद हो सकता है। टीईटी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष राजेश चौहान और सचिव केशव प्रसाद का कहना है कि इस बार टीईटी की मेरिट पर ही प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक की नौकरी मिलनी थी, इसीलिए सारी गड़बड़ियां की गईं। उन्होंने लोकायुक्त से मांग की है कि जांच के बाद यदि उनकी शिकायतें सही पाई जाएं तो नए सिरे से परिणाम जारी करने या फिर टीईटी मेरिट के आधार पर चयन न करने की संस्तुति करें। मोर्चा अध्यक्ष ने बताया कि शिकायती पत्र में अधिकारियों के नाम दिए गए हैं और किस तरह वसूली की, इसका भी ब्योरा दिया गया है। टीईटी में गड़बड़ियों का मामला पहले से कोर्ट में हैं। ऐसे में यदि लोकायुक्त ने जांच शुरू की तो मामला और उलझ सकता है।
News : Amar Ujala (16.1.12)
टूटा ‘मास्साब’ बनने का सपना-
छाता। डाक विभाग की लापरवाही से हजारों शिक्षकों का भविष्य चौपट हो रहा है। वे विभाग के खिलाफ कोर्ट की शरण में जाने की तैयारी में हैं। उन्हाेंने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से टीईटी के आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाये जाने की मांग की है। डाक विभाग की लापरवाही से हजारों अभ्यर्थियों का शिक्षक बनने का सपना चकनाचूर कर दिया है। अध्यापक पात्रता परीक्षा के भेजे गए आवेदन पत्र रोजाना सैकड़ों लोगों के वापस आ रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि डाक विभाग वैसे तो पूरे देश में स्पीड पोस्ट को पहुंचाने का चौबीस घंटे का दावा करती है। लेकिन जिन अभ्यर्थियों ने हब सेंटर आगरा से ही जाकर पांच और छह जनवरी को आवेदन डाले हैं। वे अंतिम तिथि नौ जनवरी की जगह 11 जनवरी को पहुंचे हैं। अभ्यर्थी सुधीर बाबू, भंवर सिंह, सपना, नेहा, कल्पना, आलोक, रामचंद्र और नीरज ने बताया कि उन्होंने आगरा हब सेंटर से जाकर पांच और छह जनवरी केा टीईटी के आवेदन पत्रों को लिए मैनपुरी, अलीगढ़, पंचशील नगर, प्रबुद्ध नगर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद सहित कई अन्य जगहों की जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों को स्पीड पोस्ट किया है। जिन्हें आसानी से दो दिनों के अंदर पहुंच जाना चाहिए था। लेकिन न जाने कैसे उनके अब करीब एक सप्ताह बाद फार्म वापस आ रहे हैं। इससे वे निराश हैं और डाक विभाग के खिलाफ कोर्ट में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
News : Amar Ujala (16.1.12)
Tuesday, January 10, 2012
यू.पी.टी.ई.टी. धांधली में और गिरफ्तार
अंधेर नगरी चौपट राजा
रमाबाई नगर। टीईटी परिणाम में संशोधन का सौदा पूरे 12 करोड़ में हुआ था। एक-एक परीक्षार्थी से डेढ़ लाख रुपए वसूले गए थे। और तो और इस डील में एक आईएएस स्तर का अफसर, शिक्षा विभाग के दो डिप्टी डायरेक्टर समेत सात लोग अभी भी वांछित हैं। जबकि इस मामले में 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब तक पकड़े गए लोगों से 92 लाख रुपए की बरामदगी हो चुकी है। सोमवार को रमाबाई नगर पुलिस ने लखनऊ के लिट्रेसी हाउस में बैठन...े वाले राज्य संसाधन केंद्र के एसोसिएट प्रोग्राम कोआर्डिनेटर नरेंद्र प्रताप सिंह समेत एक एनजीओ के संचालक रामशंकर मिश्र को गिरफ्तार किया है। इन दोनों के कब्जे से पांच लाख रुपए की रकम बरामद हुई। पूछताछ में दोनों ने कबूल किया है कि टीईटी परीक्षा परिणाम मेें अब तक हुए संशोधन घूसखोरी के लिए ही हुए हैं और इसका सूत्रधार शिक्षा विभाग का एक उच्च पदस्थ अधिकारी है। पुलिस अब उसी अधिकारी के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में जुट गई है।
अकबरपुर कोतवाली पुलिस ने सोमवार को लखनऊ के लिट्रेसी हाउस में बैठने वाले राज्य संसाधन केंद्र के एसोसिएट प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर नरेंद्र प्रतापसिंह और एक एनजीओ संचालक रामशंकर मिश्र को कानपुर-औरैया हाईवे पर धर दबोचा। इनके पास से पांच लाख रुपएबरामद हुए। दोनों कार से जिला जेल में बंद अपने साथियों से मुलाकात करने जा रहे थे। एसपी सुभाषचंद्र दूबे ने बताया कि सूत्रधार अधिकारी से तय हुआ था कि आठ सौ अभ्यर्थियों को अच्छे नंबरों से पास कराना है और प्रत्येक अभ्यर्थी से डेढ़-डेढ़ लाख रुपए यानी कुल 12 करोड़ रुपए लिए जाएंगे। इसमेंआठ करोड़ रुपए उक्त अधिकारी को देने थे। शेष चार करोड़ रुपए का बंटवारा नरेंद्र प्रताप और रामशंकर समेत बाकी के बीच में होना था। रिजल्ट में अब तक हुए संशोधन अभ्यर्थियों को अच्छे अंक दिलाने के लिए ही हुए हैं। एसपी ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद ही घूसखोरअफसरों का नाम खोला जाएगा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सूत्रधार माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबादकार्यालय का एक बड़ा अफसर है। इससे पहले रमाबाई नगर पुलिस ने 31 दिसंबर को अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र से 87 लाख रुपए के साथ पांच लोग पकड़े थे। इसके बाद चार दिन पहले चार अन्य लोग भी पकड़ में आ गए थे
news source jagran
Monday, January 09, 2012
समाचार
डायट को मिले 45 हजार आवेदन
छिबरामऊ, जागरण प्रतिनिधि: विशिष्ट बीटीसी भर्ती के लिए डायट पर अब तक लगभग 45 हजार आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनकी जांच व फीडिंग का कार्य करवाया जा रहा है। अब तक 15 हजार आवेदनों की जांच की जा सकी है जिनमें से मात्र 60 आवेदन ही त्रुटियों के चलते निरस्त किये गये हैं।जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पर इस समय विशिष्ट बीटीसी के आवेदनों की जांच का कार्य चल रहा है। गुरुवार देर शाम तक डायट को कुल 45 हजार आवेदन प्राप्त हो गये थे। इन सभी आवेदनों की जांच करने के साथ ही फीडिंग का कार्य भी करवाया जा रहा है। जांच के दौरान त्रुटि पूर्ण लगभग 60 आवेदन निरस्त किये जा चुके हैं। 15 हजार आवेदनों की जांच करने के साथ ही डायट कर्मियों ने फीडिंग भी कर दी है। इस बाबत प्रवक्ता डा. सुनील चतुर्वेदी ने बताया कि जिन आवेदनों की अब तक जांच की गई है उनमें से वही आवेदन निरस्त किये गये हैं जो त्रुटिपूर्ण हैं या फिर अधूरे हैं। जिन आवेदनों में छोटी मोटी खामियां हैं उन्हें निरस्त नहीं किया जा रहा है। डायट को प्रतिदिन लगभग 5 हजार आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। डायट प्राचार्य अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि विशिष्ट बीटीसी आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 9 जनवरी है। इसके बाद कोई भी आवेदन डायट स्वीकार नहीं करेगी।
News : Jagran ( 5.1.12)
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Kannoj डायट में आ रहे कानपुर से आवेदन
छिबरामऊ, जागरण प्रतिनिधि: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पर विशिष्ट बीटीसी के 40 हजार आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। जिसमें कानपुर के आवेदकों की संख्या अधिक है। कर्मचारियों द्वारा 20 हजार आवेदनों की जांच करने के साथ ही फीडिंग का काम भी किया जा चुका है।जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पर शनिवार को लगभग 40 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। कर्मचारियों की कमी को देखते हुये डायट प्रशासन द्वारा आवेदनों की जांच और फीडिंग के कार्य में प्रशिक्षणार्थियों को भी लगाया गया है। आवेदनों की जांच का कार्य देख रहे प्रवक्ता परशुराम शाक्य ने बताया कि अभी तक जिन आवेदनों की जांच हुई उनमें से कई आवेदन अन्य जनपदों के भी यहां पर भेज दिये गये हैं। ऐसे आवेदनों की छटनी कर उन्हें संबंधित जिलों की डायट पर भेजा जा रहा है। प्रवक्ता डा. सुनील चतुर्वेदी ने बताया कि जांच के दौरान केवल 70 ऐसे आवेदन थे, जो अधूरे हैं। ऐसे आवेदनों को निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि 9 जनवरी को शाम 4 बजे के बाद कोई भी आवेदन डायट द्वारा स्वीकार नहीं किया जायेगा।
News : Jagran (7.1.12)
Sunday, January 08, 2012
samachar
टीईटी: तकनीकी खामियों से बढ़ी मुश्किलें
आगरा: टीईटी परीक्षा तो किसी प्रकार संपन्न हो गई, लेकिन अब शिक्षकों के चयन में नित नई परेशानियां सामने आ रही हैं। जनपदों में आवेदनों की संख्या हजारों से बढ़कर अब लाख में पहुंच गई है। लिहाजा उनकी स्क्रूटनी और मेरिट बनाने में विभागीय कर्मचारियों की हालत खस्ता हो रही है। आगरा में शिक्षकों के 100 पदों पर अब तक मूल ड्रॉफ्ट वाले करीब 3000 और ड्रॉफ्ट की फोटोकॉपी के साथ करीब 32 हजारआवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं। जबकि एटा में 700 सीटों पर आवेदनपत्रों की संख्या सवा लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। यही नहीं, कई छात्रों ने टीईटी का संशोधित परिणाम जारी होने के बाद दोबारा फिर आवेदनपत्र भेजे हैं। गौरतलब है कि टीईटी रिजल्ट जारी होने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर शासन की ओर से आवेदन की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया गया। पांच जनपदों के स्थान पर अभ्यर्थियों को प्रदेश के किसी भी जनपद में आवेदन करने की छूट दी गई। इसके बाद अभ्यर्थियों ने एक जिले में मूल ड्रॉफ्ट भेजकर बाकी जिलों में उसकी फोटोकॉपी लगाकर फार्म भेज दिए। कर्मचारियों को समझ में नहीं आ रहा कि आखिर इन फार्मो की स्क्रूटनी और सत्यापन किस प्रकार से कराया जाए। वहीं अगर कोई फार्म कई स्थानों की मेरिट में शामिल हुआ तो संबंधित जिलों को किस प्रकार सूचना दी जाए।
News : Jagran (7.1.12)
टीईटी में पास कराने वाले रैकेट का भंडाफोड़
रमाबाई नगर। अभ्यर्थियों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) में पास कराने वाले रैकेट में रमाबाई नगर पुलिस और एसटीएफ ने मिलकर दो फरार शिक्षकाें समेत चार लोगों को पकड़ा है। इनके कब्जे से एक कार और 35 हजार रुपए बरामद हुए हैं। इन्हीं लोगों की निशानदेही पर पुलिस अब शिक्षा विभाग के एक बड़े अधिकारी पर कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है। हालांकि उक्त अधिकारी के बारे में पुलिस ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया है। एसपी सुभाषचंद्र दुबे ने बताया कि मनीष और माधव पर ढाई-ढाई हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था।मालूम हो कि रमाबाई नगर पुलिस ने बीते 31 दिसंबर 2011 को अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र में कार को रोक कर उसमें बैठे चालक सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। इनके कब्जे से 87 लाख नगद बरामद हुए थे। यह रुपए आगरा सहित आसपास के जिलों के 50 से अधिक अभ्यर्थियों से टीईटी परीक्षा में पास कराने के लिए वसूले गए थे। गिरफ्तार अभियुक्तों ने बताया था कि वे इन रुपयों को लखनऊ में बैठे मनीष उर्फ मोहन चतुर्वेदी और माधवेंद्र उर्फ माधव सिंह को आपूर्ति करने जा रहे थे।
शनिवार को अपर पुलिस अधीक्षक राकेश शंकर और सीओ सदर सुभाषचंद्र शाक्य ने बताया कि शुक्रवार की शाम को मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ के साथ रमाबाई नगर पुलिस ने कानपुर-औरैया हाइवे पर रायपुर कसबे के निकट एक आई टेन कार (यूपी80 डीपी, 5607) को घेर कर रोका और कार में बैठे मनीष चतुर्वेदी पुत्र सुरेंद्र नारायण चतुर्वेदी निवासी ग्राम पृथ्वीपुर थाना इकदिल, इटावा (औरैया के कमारा ब्लाक स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक), माधवेंद्र सिंह उर्फ माधव पुत्र स्व. सत्य प्रकाश सिंह चौहान निवसी ग्राम वाधिनी थाना बरहन, आगरा (बंदायू में प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक), हेमंत कुमार शाक्य पुत्र राधे श्याम निवासी रेलवे रोड, थाना कोतवाली मैनपुरी (ठेकेदार जल निगम) और योगेश कुमार पुत्र तेज सिंह निवासी तेजपुर थाना एका, फिरोजाबाद गिरफ्तार किया। इन सभी के कब्जे से पुलिस ने 35 हजार रुपए बरामद किए। इन अभियुक्तों ने बताया कि टीईटी अभ्यर्थियों से दो से ढाई लाख वसूले गए थे। परीक्षा में पास कराने की जिम्मेदारी जिस अधिकारी ने ली थी, उसने प्रत्येक अभ्यर्थी पर सवा लाख रुपए की मांग की थी। बताया कि प्रत्येक अभ्यर्थी पर पांच हजार रुपए कमीशन मिलना था। पुलिस ने लखनऊ और यूपी बोर्ड से कुछ लोगों के नाम तो नहीं उजागर किए, पर इतना जरूर बताया गया कि इस रैकेट में शिक्षा विभाग का एक बड़ा अधिकारी शामिल है। जिसके पहले ही पचास लाख रुपए की खेप पहुंचाई जा चुकी है। रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी पुलिस कर रही है।
News : Amar Ujala (8.1.12)
Friday, January 06, 2012
समाचार
बीएड की परीक्षा आज से
गाजियाबाद, जासंकें : चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की बीएड परीक्षा शुक्रवार से शुरू होगी। परीक्षा के लिए गाजियाबाद में सात केंद्र बनाए गए हैं।
बीएड वर्ष 2008-09 के तृतीय व 2010-11 के द्वितीय चरण की परीक्षा शुक्रवार से शुरू होगी। परीक्षा में करीब पंद्रह हजार छात्र शामिल होंगे। गाजियाबाद व पंचशील नगर में सात केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों में एमएमएच कालेज, एसडी कालेज, एसएसवी, वीएमएलजी, गिन्नी देवी कालेज मोदीनगर, केडी कालेज सिंभावली, एचएलएम कालेज बंसतपुर सैंतली शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने केंद्रों पर दस निरीक्षक लगाए हैं। जो परीक्षा पर नजर रखेंगे। इसके अलावा केंद्रों पर कालेज की नकल विरोधी टीम सक्रिय रहेगी। एमएमएच कालेज में छात्रों की संख्या सबसे अधिक है। यहां की तैयारी के संबंध में प्राचार्य डा. आरएम जौहरी ने बताया कि परीक्षा को लेकर कालेज में पूरी तैयारी की गई है। यहां किसी प्रकार की समस्या नहीं आएगी।
बीएड वर्ष 2008-09 के तृतीय व 2010-11 के द्वितीय चरण की परीक्षा शुक्रवार से शुरू होगी। परीक्षा में करीब पंद्रह हजार छात्र शामिल होंगे। गाजियाबाद व पंचशील नगर में सात केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों में एमएमएच कालेज, एसडी कालेज, एसएसवी, वीएमएलजी, गिन्नी देवी कालेज मोदीनगर, केडी कालेज सिंभावली, एचएलएम कालेज बंसतपुर सैंतली शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने केंद्रों पर दस निरीक्षक लगाए हैं। जो परीक्षा पर नजर रखेंगे। इसके अलावा केंद्रों पर कालेज की नकल विरोधी टीम सक्रिय रहेगी। एमएमएच कालेज में छात्रों की संख्या सबसे अधिक है। यहां की तैयारी के संबंध में प्राचार्य डा. आरएम जौहरी ने बताया कि परीक्षा को लेकर कालेज में पूरी तैयारी की गई है। यहां किसी प्रकार की समस्या नहीं आएगी।
अब लड़कियां चलीं मुन्ना भाई की राह
एनबीटी न्यूज ॥ नोएडा
मुन्ना भाई की तर्ज पर फर्जी तरीके से डॉक्टर, वकील बनने के के मामलों में अभी तक लड़के ही दोषी पाए जाते थे, लेकिन दनकौर पुलिस कोतवाली में दो लड़कियों के खिलाफ फर्जीवाड़े की रिपोर्ट दर्ज हुई है। यह दोनों लड़कियां महज आठवीं पास हैं और फर्जी डॉक्युमेंट्स के सहारे वह टीचर बनने चलीं थीं। उन्होंने 10 वीं, 12वीं और गै्रजुएशन तक की फर्जी मार्कशीट तैयार भी करा ली थी। कमाल की बात ये है कि इन फर्जी डॉक्युमेंट्स के सहारे दोनों का चयन बीटीसी-2010 के लिए हो भी गया। लेकिन इससे पहले कि वह टीचर बनकर राज्य के नौनिहालों का भविष्य खराब करती, उनका फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया। इसके बाद दोनों लड़कियों के खिलाफ दनकौर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।
बीटीसी-2010 के लिए पिछले दिनों 50 कैडिंडेट्स का चयन किया गया था। दनकौर स्थित डायट में सभी के डॉक्युमेंट जमा करा लिए गए। ट्रेनिंग शुरू करने से पहले डायट की प्रिंसिपल मंजू सिंह ने सभी के डॉक्युमेंट की जांच कराई। चयनित आवेदकों में दादरी निवासी राजकुमारी और जेवर निवासी मधू भी थीं। दोनों की 10 वीं, 12 वीं और ग्रैजुएशन की मार्कशीट वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की थीं। डायट की तरफ से अधिकारी डॉक्युमेंट्स जांच के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय भेजे गए। जांच में अधिकारियों ने दोनों लड़कियों के सभी एजुकेशनल डॉक्युमेंट्स को जाली पाया। डायट की प्रिंसिपल मंजू सिंह ने दनकौर कोतवाली में राजकुमारी और मधू के खिलाफ फर्जीवाड़े़ की रिपोर्ट दर्ज करा दी है। पुलिस दोनों की तलाश कर रही है।
बीटीसी फर्जीवाड़ा 2010: सीबीसीआइडी जांच से अभ्यर्थियों में हड़कम्प-----
बड़ौत (बागपत)। बीटीसी फर्जीवाड़ा 2010 के संबंध में मेरठ ब्रांच के सीबीसीआइडी इंस्पेक्टर आरपी सिंह ने भी बुधवार को भी छानबीन कर साक्ष्य जुटाए। हालांकि दूसरे दिन भी डायट से अभ्यर्थियों के शैक्षिक प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं हो सके। सीबीसीआइडी की सरगर्मी से मामले से जुड़े अभ्यर्थियों में हड़कंप मचा रहा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश भर की डायटों पर पकड़े गए फर्जी प्रमाणपत्र धारकों की सीबीसीआइडी से जांच कराई जा रही है। बड़ौत डायट से इतर मवाना, मुजफ्फरनगर, हापुड़ सहित प्रदेश की कई डायटों से संबंधित सैकड़ों अभ्यर्थियों पर जांच की तलवार लटकी है। हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित तीन महीने की समय सीमा के मद्देनजर सीबीसीआइडी की कई टीमें गठित कर छानबीन कार्य युद्धस्तर पर है।
बड़ौत डायट से संबंधित 13 अभ्यर्थियों की जांच इंस्पेक्टर आरपी सिंह कर रहे हैं। गोपनीय रूप से जारी जांच में मंगलवार और बुधवार को संबंधित अभ्यर्थियों के घर-घर जाकर उनके ब्यान दर्ज किए गए। डायट पहुंचे इंस्पेक्टर आरपी सिंह को बुधवार को भी शैक्षिक प्रमाण पत्रों की प्रमाणित छायाप्रति प्राप्त नहीं हो सकी। जब उनसे केस के संबंध में बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने गोपनीयता का हवाला देते हुए कुछ भी बताने से इंकार कर दिया।
कई प्रदेशों से जुड़े हैं तार
इस फर्जीवाड़े के तार दूसरे प्रदेशों से भी जुड़े होने के कारण यह जांच सीबीआइ को सौंपे जा सकती है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इसकी संभावना भी जताई थी। कूटरचित शैक्षिक प्रमाणपत्र मध्य प्रदेश के भोपाल बोर्ड, दिल्ली के संस्कृत महाविद्यालयों, उत्तराखंड के महाविद्यालयों से बनवाए गए थे। प्रदेश में लखनऊ विवि, आगरा विवि, संपूर्णानंद संस्कृत विवि वाराणसी का काफी स्टाफ इस गड़बड़झाले में सीधे तौर पर जुड़ा है। इनमें संपूर्णानंद विवि के दो कर्मचारी तो फिलहाल जेल में बंद हैं।
फर्जी डिग्री लेकर बने शिक्षक
फीरोजाबाद, निज प्रतिनिधि: फर्जी प्रमाण पत्र से बेसिक शिक्षा विभाग में नौैकरी पाने वाले दो और गुरुजी की सेवा समाप्ति पर मंगलवार को शिक्षाधिकारियों की मुहर लग गई। उक्त दोनों शिक्षकों ने संपूर्णानंद विवि वाराणसी की अंकतालिका लगाई थीं, लेकिन डायट द्वारा कराए गए सत्यापन में यह फर्जी पाई गई हैं। इन दोनों की बर्खास्तगी आदेश के साथ में एबीएसए को इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश ने मंगलवार को जारी कर दिए गए।मामला विलासपुर एवं शादीपुर प्राथमिक स्कूलों से जुड़ा है। बताया जाता है कमल प्रताप सिंह एंवं हरीमोहन की शिक्षक के रूप में कुछ माह पूर्व इन स्कूलों में तैनाती हुई थी। तैनाती के बाद सभी शिक्षकों के साथ इनके भी प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराने के लिए भेजा गया। इन दोनों शिक्षकों के पास में संपूर्णानंद विवि वाराणसी के शैक्षिक प्रमाण पत्र थे। डायट द्वारा कराए गए सत्यापन में संपूर्णानंद विवि वाराणसी ने इन दोनों ही शिक्षकों के प्रमाण पत्रों को फर्जी करार देते हुए कहा यह प्रमाण पत्र उनके यहां के नहीं हैं।
गत दिनों डायट से आई सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर बीएसए नरेश वर्मा ने इन दोनों शिक्षकों से जवाब तलब भी किया, लेकिन इनमें से एक शिक्षक ने फिर से जांच कराने की मांग की। नियम के अनुरुप जवाब न मिलने पर बीएसए ने दोनों शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दीं।
एफआईआर होगी
इस संबंध में बीएसए नरेश वर्मा ने कहा कि उक्त दोनों शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर कराने के निर्देश एबीएसए को दिए गए हैं।
News : Jagran Epaperगत दिनों डायट से आई सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर बीएसए नरेश वर्मा ने इन दोनों शिक्षकों से जवाब तलब भी किया, लेकिन इनमें से एक शिक्षक ने फिर से जांच कराने की मांग की। नियम के अनुरुप जवाब न मिलने पर बीएसए ने दोनों शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दीं।
एफआईआर होगी
इस संबंध में बीएसए नरेश वर्मा ने कहा कि उक्त दोनों शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर कराने के निर्देश एबीएसए को दिए गए हैं।
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बीटीसी फर्जीवाड़ा : डायट पर पहुंची सीबीसीआइडी
बड़ौत(बागपत)। चौधरी चरण सिंह जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बड़ौत में बुधवार को सीबीसीआइडी अधिकारी ने बीटीसी 2010 में पकड़े गए फर्जी डिग्रीधारकों और फर्जीवाड़े में शामिल शिक्षा रैकेट के संबंध में जानकारी जुटाई।
शासन ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से बनाई गई फर्जी डिग्रियों की जांच सीबीसीआइडी को सौंपी है। छानबीन के सिलसिले में बुधवार को कानपुर से सीबीसीआइडी इंस्पेक्टर रामपाल सिंह बड़ौत डायट पर पहुंचे और फर्जी प्रमाण-पत्रधारकों सहित इस रैकेट में शामिल शिक्षा माफिया के संबंध में दस्तावेज एकत्र किए। खुफिया विभाग के इंस्पेक्टर रामपाल सिंह ने बताया कि वाराणसी के संपूर्णानंद विवि से जांच शुरू की गई है। वहां जांच में फर्जीवाडे़ रैकेट में शामिल लोगों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। मामले में लिप्त विवि के रजिस्ट्रार कार्यालय के दो लिपिकों विजयशंकर शुक्ल और मेहर मिश्र की गिरफ्तारी हो चुकी है। रिमांड पर की गई पूछताछ में उन्होंने इस मामले में बागपत जिले के मां अंबा बालिका महाविद्यालय के ब्रजपाल शास्त्री, श्री दादू बलराम संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य साधुराम शास्त्री और तेजपाल शास्त्री का शामिल होना स्वीकारा है। इसके अलावा इस फर्जी रैकेट में मथुरा के पातीराम शास्त्री और अभय शास्त्री का नाम भी सामने आया है।
लगातार जांच जारी रहेगी
बड़ौत : इंस्पेक्टर आरपी सिंह ने बताया कि अभी तक की जांच में दो अभ्यर्थियों रेखा तोमर और शमा प्रवीण के प्रमाणपत्र फर्जी सिद्ध मिले हैं। इनके अलावा संपूर्णानंद विवि से संबंधित कुल 146 अभ्यर्थियों ने फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र बनवाए थे। इनकी जांच प्रगति पर है। बड़ौत डायट के बाद मवाना, हापुड़ डायटों पर जांच की जाएगी। वहीं बागपत में खेकड़ा, ग्वालीखेड़ा और मेरठ के संस्कृत महाविद्यालयों के रिकार्ड भी खंगाले जाएंगे। अधिकतर फर्जी प्रमाण-पत्र यहीं से बनवाए गए हैं।
अभी सिर्फ बीटीसी 2010 के फर्जियों की जांच
बड़ौत : शासन के निर्देश में संपूर्णानंद संस्कृत विवि वाराणसी से संबंधित सिर्फ बीटीसी 2010 के फर्जी प्रमाण-पत्रधारकों पर जांच केंद्रित की गई है। बड़ौत डायट पर ऐसे 59 अभ्यर्थियों का नाम प्रकाश में आया है। इनके खिलाफ पूर्व में एफआइआर दर्ज कराई जा चुकी है। इस जांच के पूरी हो जाने के बाद यहां से पूर्व के सालों में बनवाए गए फर्जी प्रमाण-पत्रधारकों पर शिकंजा कसा जाएगा।
News : Jagran Epaperशासन ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से बनाई गई फर्जी डिग्रियों की जांच सीबीसीआइडी को सौंपी है। छानबीन के सिलसिले में बुधवार को कानपुर से सीबीसीआइडी इंस्पेक्टर रामपाल सिंह बड़ौत डायट पर पहुंचे और फर्जी प्रमाण-पत्रधारकों सहित इस रैकेट में शामिल शिक्षा माफिया के संबंध में दस्तावेज एकत्र किए। खुफिया विभाग के इंस्पेक्टर रामपाल सिंह ने बताया कि वाराणसी के संपूर्णानंद विवि से जांच शुरू की गई है। वहां जांच में फर्जीवाडे़ रैकेट में शामिल लोगों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। मामले में लिप्त विवि के रजिस्ट्रार कार्यालय के दो लिपिकों विजयशंकर शुक्ल और मेहर मिश्र की गिरफ्तारी हो चुकी है। रिमांड पर की गई पूछताछ में उन्होंने इस मामले में बागपत जिले के मां अंबा बालिका महाविद्यालय के ब्रजपाल शास्त्री, श्री दादू बलराम संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य साधुराम शास्त्री और तेजपाल शास्त्री का शामिल होना स्वीकारा है। इसके अलावा इस फर्जी रैकेट में मथुरा के पातीराम शास्त्री और अभय शास्त्री का नाम भी सामने आया है।
लगातार जांच जारी रहेगी
बड़ौत : इंस्पेक्टर आरपी सिंह ने बताया कि अभी तक की जांच में दो अभ्यर्थियों रेखा तोमर और शमा प्रवीण के प्रमाणपत्र फर्जी सिद्ध मिले हैं। इनके अलावा संपूर्णानंद विवि से संबंधित कुल 146 अभ्यर्थियों ने फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र बनवाए थे। इनकी जांच प्रगति पर है। बड़ौत डायट के बाद मवाना, हापुड़ डायटों पर जांच की जाएगी। वहीं बागपत में खेकड़ा, ग्वालीखेड़ा और मेरठ के संस्कृत महाविद्यालयों के रिकार्ड भी खंगाले जाएंगे। अधिकतर फर्जी प्रमाण-पत्र यहीं से बनवाए गए हैं।
अभी सिर्फ बीटीसी 2010 के फर्जियों की जांच
बड़ौत : शासन के निर्देश में संपूर्णानंद संस्कृत विवि वाराणसी से संबंधित सिर्फ बीटीसी 2010 के फर्जी प्रमाण-पत्रधारकों पर जांच केंद्रित की गई है। बड़ौत डायट पर ऐसे 59 अभ्यर्थियों का नाम प्रकाश में आया है। इनके खिलाफ पूर्व में एफआइआर दर्ज कराई जा चुकी है। इस जांच के पूरी हो जाने के बाद यहां से पूर्व के सालों में बनवाए गए फर्जी प्रमाण-पत्रधारकों पर शिकंजा कसा जाएगा।
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जांचा तो मिले 12 नटवर लाल
कुशीनगर : इस जिले में 12 शिक्षक प्रशिक्षु फर्जी पाये गये हैं। विशिष्ट बी.टी.सी. 2008 सामान्य व विशेष चयन में चयनित और यहां के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षित इन शिक्षकों में 11 देवरिया तथा 1 गोरखपुर जनपद का निवासी है। जांच में उजागर इनके चौकाने वाले कारनामों को देख सभी के दांत खट्टे हो रहे हैं। लगता है नटवर लाल की पूरी टीम उतर आई है।आइये कुछ बानगियां देखें। चयनित होने के बाद बाकायदा सैद्धांतिक व क्रियात्मक प्रशिक्षण ले चुके 12 पुरुष व महिला प्रशिक्षुओं ने कुशीनगर के प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद की नौकरी के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को आवेदन किया। नियुक्ति के पूर्व गहन जांच में फर्जी पाये गये देवरिया के दो अभ्यर्थी प्रमोद कुमार यादव पुत्र चन्द्रिका यादव ने सामान्य तो दूसरे प्रमोद कुमार यादव पुत्र चन्द्रिका यादव ने विशेष चयन के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इन दोनों ने जिस मूल व्यक्ति के अंक पत्र व प्रमाण पत्रों का प्रयोग किया है वह बलिया जनपद स्थित एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक है। इसी तरह का दूसरा मामला देवरिया के शिवेन्दु त्रिपाठी पुत्र सीताराम त्रिपाठी का है। इस प्रशिक्षु ने जिस व्यक्ति के शैक्षिक अभिलेखों का प्रयोग किया है जांच में वह सतीश चन्द्र महाविद्यालय बलिया में प्रवक्ता के रूप में कार्यरत पाया गया। देवरिया की ही धारणा आर्या पुत्री मकसूदन आर्या नाम की महिला प्रशिक्षु भी फर्जी निकली। इस नाम की मूल महिला दिल्ली में नौकरी कर रही है। देवरिया के ही सुरेन्द्र प्रताप सिंह पुत्र मयन बहादुर सिंह नाम का प्रशिक्षु भी फर्जी मिला। सुरेन्द्र ने जिसका अंक पत्र व प्रमाण पत्र प्रयोग कर चयन पाया है इस नाम का मूल व्यक्ति जौनपुर जनपद स्थित प्राथमिक विद्यालय में बतौर शिक्षक कार्यरत है। देवरिया के अमरेन्द्र नाथ तिवारी पुत्र हीरम नाथ तिवारी का हाईस्कूल से लेकर बी.एड. तक का अंक पत्र व प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाया गया। इसी क्रम में देवरिया के राजेश कुमार पाण्डेय पुत्र जनार्दन पाण्डेय, धीरेन्द्र कुमार यादव पुत्र लालता प्रसाद यादव, अर्चना त्रिपाठी पुत्री सुदामा राम त्रिपाठी के अंक पत्र व प्रमाण पत्र फर्जी मिले। देवरिया के शैलेन्द्र कुमार यादव एवं संगीता यादव आपस में भाई-बहन हैं। इन दोनों का बी.ए. का अंक पत्र फर्जी पाया गया है। गोरखपुर जनपद निवासी राजन पुत्र जवाहिर का अंक पत्र व प्रमाण पत्र भी फर्जी मिला।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आर.पी. पाल ने कहा कि श्री पाल ने कहा कि ऐसे नटवर लाल जेल जायेंगे। फर्जीवाडे़ में चिह्नित सभी 12 अभ्यर्थियों को मूल अभिलेखों के साथ 20 दिसम्बर को बेसिक कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए एक मौका दिया जा रहा है।
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फर्जीवाडा की शुरू हुई जांच, हड़कम्प
पडरौना, कुशीनगर :कमिश्नर पी.के.महान्ति के आदेश पर कुशीनगर में विशिष्ट बी.टी.सी. 2008 सामान्य चयन के सभी मामलों की गहनता से जांच शुरू हो गयी है। फर्जीवाड़ा पर अंकुश लगाने व प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके अपात्रों तक पहुंचने की कवायद से जहां कईयों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं तो प्रतीक्षा सूची की राह निहार रहे अभ्यर्थियों में उम्मीद जगी है।
विशिष्ट बी.टी.सी. 2008 सामान्य चयन में दूसरों के उच्च प्राप्तांक अंक पत्र के आधार पर चयन कराने वाले कई नटवर लाल के पुख्ता प्रमाण होने के बाद एक महिला अभ्यर्थी द्वारा शपथ पत्र पर मण्डलायुक्त से की गयी शिकायत अब रंग लायी है। कमिश्नर पी.के. महान्ति ने डायटों में संचालित हो रहे फर्जीवाड़ों की गम्भीरता पर त्वरित एक्शन लेते हुए 1 सितम्बर को त्रिस्तरीय जांच टीम गठित कर दी थी। जिसमें शीतला प्रसाद अपर आयुक्त प्रशासन गोरखपुर, डा. राम नरायण क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी गोरखपुर तथा बेसिक शिक्षा अधिकारी कुशीनगर को नामित किया। साथ डायट पहुंच पत्रावलियों की गहन जांच करने, शिकायत कर्ता का बयान दर्ज करते हुए 25 सितम्बर तक दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम का उल्लेख करते हुए आख्या देने का निर्देश दिया था। जांच शुरू न होने पर दोबारा शिकायत पर जांच टीम रविवार को डायट पहुंची और चयन से जुड़ी सारी पत्रावलियों को खंगालना शुरू कर दिया। शीतला प्रसाद की देखरेख में शुरू हुई जांच सभी सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिविनि व डायट से जुड़े कर्मचारी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके अंक पत्र, प्रमाण पत्र, गुणांक आदि की गहन जांच की जा रही है। शीतला प्रसाद बताते हैं कि पंचायत चुनाव के कारण जांच में थोड़ा विलम्ब हुआ लेकिन अब जांच शुरू हो गयी है। दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान फर्जीवाड़ा में संलिप्तता पाये जाने पर दोषी चाहे जो भी हो निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी।
संदिग्धों का प्रशिक्षण रोका गया : जिविनि
पडरौना : जिला विद्यालय निरीक्षक व डायट के प्रभारी प्राचार्य रामचेत कहते हैं कि विशिष्ट बी.टी.सी. 2008 सामान्य चयन में कुल 800 अभ्यर्थियों का चयन होना था जिसमें 360 सीट पुरुष व 360 महिला तथा 80 शिक्षा मित्रों के लिए आरक्षित था। उन्होंने बताया कि प्रथम बैच के 158 की नियुक्ति हो चुकी है। द्वितीय बैच के 289 अभ्यर्थियों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। जिनकी सूची नियुक्ति के लिए बेसिक कार्यालय भेजी गयी है। जबकि तृतीय बैच के 45 अभ्यर्थी ट्रेनिंग ले रहे हैं और 4 प्रशिक्षण छोड़ चुके हैं। जिविनि बताते हैं कि चयन के बाद संदिग्ध पाये जाने पर तमाम अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण रोक दिया गया है।
27 के फर्जी होने का आरोप
पडरौना : महिला अभ्यर्थी द्वारा मण्डलायुक्त पी.के. महान्ति को शपथ पत्र पर की गयी फर्जीवाड़ा की शिकायत में 14 पुरुष व 13 महिला अभ्यर्थियों के नाम तो सूचीबद्ध कर दिये गये हैं। जिसमें कई तो ऐसे हैं जो सरकारी नौकरी में कार्यरत हैं और उनके अंक पत्र व प्रमाण पत्र पर यहां चयन करा लिया गया है।
News : Jagran Epaperविशिष्ट बी.टी.सी. 2008 सामान्य चयन में दूसरों के उच्च प्राप्तांक अंक पत्र के आधार पर चयन कराने वाले कई नटवर लाल के पुख्ता प्रमाण होने के बाद एक महिला अभ्यर्थी द्वारा शपथ पत्र पर मण्डलायुक्त से की गयी शिकायत अब रंग लायी है। कमिश्नर पी.के. महान्ति ने डायटों में संचालित हो रहे फर्जीवाड़ों की गम्भीरता पर त्वरित एक्शन लेते हुए 1 सितम्बर को त्रिस्तरीय जांच टीम गठित कर दी थी। जिसमें शीतला प्रसाद अपर आयुक्त प्रशासन गोरखपुर, डा. राम नरायण क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी गोरखपुर तथा बेसिक शिक्षा अधिकारी कुशीनगर को नामित किया। साथ डायट पहुंच पत्रावलियों की गहन जांच करने, शिकायत कर्ता का बयान दर्ज करते हुए 25 सितम्बर तक दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम का उल्लेख करते हुए आख्या देने का निर्देश दिया था। जांच शुरू न होने पर दोबारा शिकायत पर जांच टीम रविवार को डायट पहुंची और चयन से जुड़ी सारी पत्रावलियों को खंगालना शुरू कर दिया। शीतला प्रसाद की देखरेख में शुरू हुई जांच सभी सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिविनि व डायट से जुड़े कर्मचारी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके अंक पत्र, प्रमाण पत्र, गुणांक आदि की गहन जांच की जा रही है। शीतला प्रसाद बताते हैं कि पंचायत चुनाव के कारण जांच में थोड़ा विलम्ब हुआ लेकिन अब जांच शुरू हो गयी है। दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान फर्जीवाड़ा में संलिप्तता पाये जाने पर दोषी चाहे जो भी हो निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी।
संदिग्धों का प्रशिक्षण रोका गया : जिविनि
पडरौना : जिला विद्यालय निरीक्षक व डायट के प्रभारी प्राचार्य रामचेत कहते हैं कि विशिष्ट बी.टी.सी. 2008 सामान्य चयन में कुल 800 अभ्यर्थियों का चयन होना था जिसमें 360 सीट पुरुष व 360 महिला तथा 80 शिक्षा मित्रों के लिए आरक्षित था। उन्होंने बताया कि प्रथम बैच के 158 की नियुक्ति हो चुकी है। द्वितीय बैच के 289 अभ्यर्थियों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। जिनकी सूची नियुक्ति के लिए बेसिक कार्यालय भेजी गयी है। जबकि तृतीय बैच के 45 अभ्यर्थी ट्रेनिंग ले रहे हैं और 4 प्रशिक्षण छोड़ चुके हैं। जिविनि बताते हैं कि चयन के बाद संदिग्ध पाये जाने पर तमाम अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण रोक दिया गया है।
27 के फर्जी होने का आरोप
पडरौना : महिला अभ्यर्थी द्वारा मण्डलायुक्त पी.के. महान्ति को शपथ पत्र पर की गयी फर्जीवाड़ा की शिकायत में 14 पुरुष व 13 महिला अभ्यर्थियों के नाम तो सूचीबद्ध कर दिये गये हैं। जिसमें कई तो ऐसे हैं जो सरकारी नौकरी में कार्यरत हैं और उनके अंक पत्र व प्रमाण पत्र पर यहां चयन करा लिया गया है।
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फर्जी साबित हुए तो पड़ेगा महंगा
बड़ौत, बागपत। चौधरी चरण सिंह जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पर फर्जी डिग्री के सहारे बीटीसी में चयनित होने का ख्वाब अभ्यर्थियों को महंगा पड़ने वाला हैं। डायट प्राचार्य ऐसे अभ्यर्थियों को सस्ते में छोड़ने के मूड में नहीं हैं और गोपनीय रूप से इनके प्रमाण-पत्रों की जांच कराई जा रही है।
डायट पर बीटीसी चयन प्रक्रिया 2010 में फर्जी प्रमाण-पत्र लगाकर चयनित होने के सपने देखने वालों पर प्राचार्य कड़ी नजर रखे हुए हैं। वर्तमान में डायट पर शासन से बढ़ी पचास सीटों पर काउंसिलिंग का कार्य प्रगति पर है। पूर्व में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से डिग्री प्राप्त करने वाले अधिकतर अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए थे। इसी के चलते वर्तमान काउंसलिंग में ऐसे अभ्यर्थियों पर पैनी नजर रखी जा रही है और इनके प्रमाण-पत्रों की गोपनीय जांच कराई जा रही है। इस बार प्राचार्य डा. राजकुमार दुबे ऐसे अभ्यर्थियों को सस्ते में छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहे और सबूतों के साथ इन पर कड़ी कार्रवाई करना चाहते हैं। ऐसे में अगर डायट पर काउंसलिंग के दौरान जमा सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रमाण-पत्र फर्जी निकले तो इन अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण से तो हाथ धोना ही पड़ेगा और मुकदमा भी झेलना पडे़गा। मगर अभी तक सभी अभ्यर्थी अपने प्रमाण-पत्रों को सही होने का दावा कर रहे है और अपने प्रमाण-पत्रों को जांच विश्वविद्यालय से कराए जाने की बात कर रहे हैं।
शिक्षा माफिया की साठगांठ से बने प्रमाण-पत्र
बड़ौत : जनपद में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से संबद्ध तीन संस्कृत महाविद्यालय हैं। इनमें ग्वालीखेड़ा, खेकड़ा, किरठल शामिल हैं। इनसे छात्रों को बीए, एमए में क्रमश: शास्त्री और आचार्य की उपाधि लेते हैं। इनसे प्राप्त डिग्री को अधिकतर विश्वविद्यालय मान्यता देते हैं। मगर शिक्षा माफिया की साठगांठ के चलते सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से हाईस्कूल से लेकर बीए तक के फर्जी प्रमाण-पत्र धड़ल्ले से बनवाए जा रहे हैं। इन माफिया के झांसे में आकर अभ्यर्थी फर्जी प्रमाण-पत्रों सहारे बीटीसी में चयनित होना चाहते हैं। ज्ञात रहे सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के बीएड कॉलेज भी संचालित हैं।
डायट पर बीटीसी चयन प्रक्रिया 2010 में फर्जी प्रमाण-पत्र लगाकर चयनित होने के सपने देखने वालों पर प्राचार्य कड़ी नजर रखे हुए हैं। वर्तमान में डायट पर शासन से बढ़ी पचास सीटों पर काउंसिलिंग का कार्य प्रगति पर है। पूर्व में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से डिग्री प्राप्त करने वाले अधिकतर अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए थे। इसी के चलते वर्तमान काउंसलिंग में ऐसे अभ्यर्थियों पर पैनी नजर रखी जा रही है और इनके प्रमाण-पत्रों की गोपनीय जांच कराई जा रही है। इस बार प्राचार्य डा. राजकुमार दुबे ऐसे अभ्यर्थियों को सस्ते में छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहे और सबूतों के साथ इन पर कड़ी कार्रवाई करना चाहते हैं। ऐसे में अगर डायट पर काउंसलिंग के दौरान जमा सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रमाण-पत्र फर्जी निकले तो इन अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण से तो हाथ धोना ही पड़ेगा और मुकदमा भी झेलना पडे़गा। मगर अभी तक सभी अभ्यर्थी अपने प्रमाण-पत्रों को सही होने का दावा कर रहे है और अपने प्रमाण-पत्रों को जांच विश्वविद्यालय से कराए जाने की बात कर रहे हैं।
शिक्षा माफिया की साठगांठ से बने प्रमाण-पत्र
बड़ौत : जनपद में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से संबद्ध तीन संस्कृत महाविद्यालय हैं। इनमें ग्वालीखेड़ा, खेकड़ा, किरठल शामिल हैं। इनसे छात्रों को बीए, एमए में क्रमश: शास्त्री और आचार्य की उपाधि लेते हैं। इनसे प्राप्त डिग्री को अधिकतर विश्वविद्यालय मान्यता देते हैं। मगर शिक्षा माफिया की साठगांठ के चलते सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से हाईस्कूल से लेकर बीए तक के फर्जी प्रमाण-पत्र धड़ल्ले से बनवाए जा रहे हैं। इन माफिया के झांसे में आकर अभ्यर्थी फर्जी प्रमाण-पत्रों सहारे बीटीसी में चयनित होना चाहते हैं। ज्ञात रहे सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के बीएड कॉलेज भी संचालित हैं।
Thursday, January 05, 2012
high court writ
टीईटी के आधार पर भर्ती मामले में जवाब तलब
लखनऊ, 4 जनवरी (विधि संवाददाता): इलाहाबाद उच्च न्यायालय में शिक्षक पात्रता परीक्षा टीईटी के आधार पर शिक्षकों की भर्ती किए जाने संबन्धी राज्य सरकार के शासनादेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। इस मामले में अगली सुनवाई नौ जनवरी को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रदीपकांत व न्यायमूर्ति रितुराज अवस्थी की खंडपीठ ने याची कुलदीप श्र...ीवास्तव की ओर से दायर जनहित याचिका पर दिए हैं। जनहित याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए शासनादेश विधि विरुद्ध तथा गैरकानूनी हैं। इनको रद किया जाए। कहा गया कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षक अध्यापक सेवा नियमावली के तहत की जानी चाहिए। यह भी कहा गया कि राज्य सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा के आधार पर भर्ती किए जाने के शासनादेश गत 30 नवंबर 2011 व 20 दिसंबर 2011 को जारी किए गए हैं। याचिका में तर्क दिया गया है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) केवल अध्यापकों की पात्रता तय करने के लिए है। इस आधार पर भर्ती किया जाना विधि सम्मत नहीं है। जनहित याचिका में मांग की गई है कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली के तहत की जाए। यह भी कहा गया कि टीईटी के आधार पर चयन किए जाने पर रोक लगाई जाए तथा शासनादेशों को रद किया जाए।
high court decision
72 हजार 825 अध्यापकों की नियुक्तियों पर रोक
इलाहाबाद। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अध्यापक पात्रता परीक्षण (टीईटी) चयन के तहत राज्य के 75 जिलों में 72 हजार 825 प्राथमिक सहायक अध्यापकों की नियुक्ति एवं चयन पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया 30 नवम्बर 11 को बोर्ड द्वारा राज्य के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों की तरफ से जारी विज्ञापन नियम 14 के विपरीत हैं।
अदालत ने मामले की सुनवाई 11 जनवरी को नियत करते हुए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश एवं बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को अगली तिथि पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल ने वाराणसी के यादव क पिलदेव लाल बहादुर की याचिका पर यह आदेश है।
याची अधिवक्ता ने बहस की कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा "शिक्षक सेवा नियमावली" के नियम 14 के अन्र्तगत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को ही नियुक्ति, चयन का विज्ञापन जारी करने का अधिकार है। बोर्ड के सचिव द्वारा सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों की तरफ से विज्ञापन जारी किया गया नियम का उल्लघंन है। ऎसे में 30 नवम्बर को जारी विज्ञापन निरस्त होने योग्य है। बोर्ड को विज्ञापन जारी करने का अधिकार नहीं है।
इलाहाबाद। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अध्यापक पात्रता परीक्षण (टीईटी) चयन के तहत राज्य के 75 जिलों में 72 हजार 825 प्राथमिक सहायक अध्यापकों की नियुक्ति एवं चयन पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया 30 नवम्बर 11 को बोर्ड द्वारा राज्य के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों की तरफ से जारी विज्ञापन नियम 14 के विपरीत हैं।
अदालत ने मामले की सुनवाई 11 जनवरी को नियत करते हुए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश एवं बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को अगली तिथि पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल ने वाराणसी के यादव क पिलदेव लाल बहादुर की याचिका पर यह आदेश है।
याची अधिवक्ता ने बहस की कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा "शिक्षक सेवा नियमावली" के नियम 14 के अन्र्तगत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को ही नियुक्ति, चयन का विज्ञापन जारी करने का अधिकार है। बोर्ड के सचिव द्वारा सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों की तरफ से विज्ञापन जारी किया गया नियम का उल्लघंन है। ऎसे में 30 नवम्बर को जारी विज्ञापन निरस्त होने योग्य है। बोर्ड को विज्ञापन जारी करने का अधिकार नहीं है।
Wednesday, January 04, 2012
result niyukti
टीईटी का अंतिम परिणाम जल्द
इलाहाबाद : माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का अंतिम संशोधित परिणाम एक सप्ताह के भीतर आ जाएगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद यूपी बोर्ड को प्रदेशभर से करीब 12,500 आपत्तियां मिली हैं। सोमवार को आपत्तियां लेने का अंतिम दिन था। आज ही सभी आपत्तियों को निस्तारण के लिए संबंधित एजेंसी को भेज दिया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा में कई प्रश्नों और उनके विकल्पों पर अभ्यर्थियों ने आपत्तियां जताई थी। परिषद ने कुछ आपत्तियों का संज्ञान लिया और उन्हें संशोधित भी कर दिया। इसके बाद संशोधित परीक्षा परिणाम भी जारी कर दिया गया। इस संशोधन में अभ्यर्थियों को कुछ अंकों का लाभ हुआ। हालांकि परिषद द्वारा दूर की गई आपत्तियों के दूर करने के बाद भी अभ्यर्थी कई प्रश्नों के जवाब से संतुष्ट नहीं थे। यूपी बोर्ड को प्रार्थना पत्र देने के बाद भी जब आपत्तियां दूर नहीं की गई तो अभ्यर्थी हाईकोर्ट चले गए। याचिकाएं दायर कर दीं। इन याचिकाओं की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों की सभी आपत्तियों का निस्तारण करने का 17 दिसंबर को आदेश दिया। हाईकोर्ट ने ग्रीवांस सेल का गठन करने और 100 रुपये शुल्क के साथ आपत्तियां लेने का निर्देश दिया। इसके बाद परिषद अभ्यर्थियों की आपत्तियां ले रहा था। इस बीच बोर्ड ने दो बार परीक्षा परिणाम को संशोधित भी कर दिया। अभी हाल ही में चार हजार परीक्षार्थियों के परीक्षा संशोधित किए गए हैं। परिषद द्वारा कुछ दिनों में फाइनल और अंतिम परीक्षा परिणाम जारी कर दिया जाएगा। बोर्ड सूत्रों के मुताबिक परिषद द्वारा अंतिम संशोधित परिणाम को निकालने के बाद अब कोई संशोधन नहीं किया जाएगा।
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टीईटी अभ्यर्थियों को झटका चुनाव आचार संहिता के कारण नहीं हो सकेगी शिक्षकों की तैनाती
एक करोड़ से अधिक फॉर्म पहुंचे डायट, स्क्रूटनी में ही लगेंगे हफ्तों
कुलदीप इलाहाबाद। चुनाव से पहले प्राइमरी स्कूलों में नियुक्ति की उम्मीद में रात-रात भर लाइन में खड़े रहकर फॉर्म जमा करने वालों को जोर का झटका लग सकता है। विधि विशेषज्ञों ने शासन को सलाह दी है कि चुनाव आचार संहिता के कारण शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकती। चयन प्रक्रिया पहले से चल रही है इसलिए उप पर रोक नहीं लगेगी लेकिन जो हालात हैं, जिलों में लिस्ट फाइनल करने में ही चुनाव गुजर जाएगा। दो दिन पहले लखनऊ में डायट और सर्व शिक्षा अभियान अधिकारियों की संयुक्त बैठक में यह तथ्य सामने आया कि विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने से पहले नियुक्तियां नहीं हो सकती और तब तक सभी जिलों में चयन की सूची फाइनल न हुई तो आगे का फैसला नई सरकार पर होगा। हालांकि बैठक में चयन प्रक्रिया को लेकर कोई नया फैसला नहीं हुआ। अधिकारियों का कहना है कि चयन प्रक्रिया चलती रहेगी लेकिन परिणाम पर रोक लग सकती है। हालांकि परिणाम निकलने की स्थिति बनेगी, इसी में संदेह है। चयन प्रक्रिया से जुड़े सर्व शिक्षा अभियान अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश भर में एक करोड़ से अधिक फॉर्म पहुंच चुके हैं और नौ जनवरी तक जाहिर है यह संख्या बढ़ेगी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद लगभग 15 हजार अभ्यर्थियों ने यूपी बोर्ड में परिणाम संशोधन के लिए आवेदन किया है। इन अभ्यर्थियों के परिणाम सात जनवरी तक जारी हो सकते हैं। ये अभ्यर्थी भी अन्य जिलों से आवेदन करेंगे। अफसरों के मुताबिक ज्यादातर अभ्यर्थियों ने 40 से 45 जिलों से आवेदन किया है। जिन जिलों में 50 हजार या अधिक फॉर्म पहुंचे, वहां स्क्रूटनी में ही दो हफ्ते से अधिक लग जाएंगे। स्क्रूटनी के बाद उन पर आपत्तियां और उसके संशोधन के लिए वक्त देना होगा। फिर काउंसलिंग में हफ्ते भर से अधिक लग सकते हैं। यानी नौ जनवरी को फॉर्म जमा करने की तिथि खत्म होने के बाद भी स्क्रूटनी होने लगे तो भी वक्त पर पूरा होना मुश्किल है। बैठक में शामिल निदेशालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जो हालात बन रहे हैं, नियुक्तियां अटक सकती हैं।
News : Amar Ujala (03.1.12)
Tuesday, January 03, 2012
uptet
विशिष्ट बीटीसी शिक्षकों की भर्ती में इस बार जिले में विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित और पूर्व सैनिकों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि अन्य सभी वर्गो को आरक्षण की सुविधा यथावत मिलेगी। जिले में कुल 12 विशिष्ट बीटी शिक्षकों का चयन होना है। इसमें विकलांग, स्वतंत्रता सेनानी आश्रित एवं पूर्व सैनिक का निर्धारित कोटा सीट कम होने से मानक के लिए अर्ह न्यूनतम अंक सीमा से कम हो रहा है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान ने विशिष्ट बीटी के 12 पदों के चयन की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। टीईटी परीक्षा उत्तीण करने वालों को विशिष्ट बीटीसी चयन प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि नौ जनवरी है। अभी तक ढाई हजार आवेदन फार्म डायट में जमा हो चुके हैं। डायट ने आरक्षण देने के लिए जो फार्मूला तय किया है, उसके तहत जिले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित, पूर्व सैनिक और विकलांगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकेगा। फार्मूला के तहत तीन बीसी, दो एससी, एक एसटी, एक शिक्षमित्र और जनरल कोेटे के पांच अभ्यर्थियों को शिक्षक पद पर चयन का मौका मिलेगा। विशिष्ट बीटीसी चयन प्रक्रिया प्रभारी बीरेंद्र सिंह यादव ने बताया जिस वर्ग के आरक्षण में .5 से अधिक हिस्सा आ रहा है, उसके लिए एक सीट आरक्षित की गई है। जिस वर्ग के हिस्से में इससे कम आ रहा है, उसे आरक्षण की सुविधा से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने बताया विकलांग, पूर्व सैनिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित के लिए .5 से कम हिस्सा आ रहा है। ऐसी हालत में इन तीनों वर्गो के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं की गई है। ऐसी हालत में इन वर्गो को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। आरक्षण का लाभ पिछड़े, अनुसूचित, अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों को ही मिल सकेगा।
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